क्षमाशील बनें

सुप्रभात!! “क्षमा बड़न को चाहिए, छोटन को उत्पात।  का रहीम हरि को घट्यो, जो भृगु मारी लात।।” बड़ों को चाहिए कि छोटों को उनकी नासमझी के लिए क्षमा कर दें। अर्थात जो क्षमा करते हैं, वही बड़े हैं।  ईर्ष्या-द्वेष रखने से आप स्वयं पर बोझ डाल रहे हैं और दुःखों को बुलावा दे रहे हैं।Continue reading “क्षमाशील बनें”