समझ जरूरी या संवाद??

सुप्रभात!

आज की सुबह का बड़ा सवाल-“क्या प्यार और मित्रता 24 घंटे संवाद के मोहताज हैं?”

आज की पीढ़ी की मानें तो यही सही है। ऐसा लगता है नई पीढ़ी ने समझ और संवाद को एक दूजे का पर्यायवाची मान लिया है। मैने ऐसे कई प्रेमी युगल देखे हैं जो शादी से पहले दिन भर एक दूजे के फोन पर चिपके रहते थे और वजह बताई जाती थी कि इससे आपसी समझ बढ़ रही है; एक दूजे को समझना जरूरी है शादी से पहले….वगैरह-वगैरह!

दूसरी ओर मेरा तज़ुर्बा और आंकड़े कहते हैं कि ऐसे अधिकांश प्रेमी युगल जब एक दूजे को अच्छे से समझ कर शादी कर लेते हैं और कुछ ही दिन बाद उन्हें समझ में आता है कि वे एक दूजे के लिए नहीं बने हैं। फिर झगड़े, तू-तू, मैं-मैं और कई जोड़ों में तो बात तलाक़ तक पहुँच जाती है।

असली प्यार वो है जो आपके मौन को पढ़ ले, असली मित्रता वह है जो आपकी हंसी में छिपे दर्द को पहचान ले। इसके लिए आवश्यक नही कि घंटों संवाद हो। चुप्पी की भाषा जिसकी समझ मे आ गई उसे रिश्ते निभाने में कभी कोई गलती हो ही नहीं सकती।

ईश्वर हम सभी को समझ और संवाद का महत्व जानने की क्षमता प्रदान करें।

Published by DR. TRILOK SHARMA

I have traveled a long way towards the final destination of life. Many times I took a wrong turn on the road and spend a lot of precious time to come back on main road. Many times, I helped & supported the people who did not deserve my attention, and unknowingly ignored the ones who cared for me. Through this site, I want to put some traffic signs on the route of life to help those who are willing not to make similar mistakes that I did.

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