तोल मोल कर बोल!

सुप्रभात! 1 जुलाई 1975 को मैंने जब 6ठी कक्षा में धरियावद के उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रवेश लिया था तब सर्वप्रथम मैंने वहां बरामदे की दीवार पर लिखा ठाकुर रवीन्द्रनाथ टैगोर का यह कथन पढ़ा था- थोड़ा पढ़ना, अधिक सोचना; कम बोलना, अधिक सुनना यह बुद्धिमान बनने के उपाय हैं। जैसे-जैसे बड़ा होता गया औरContinue reading “तोल मोल कर बोल!”