हमें एक खुशी मिलती है, हम उसका आनंद उठाने से पहले ही दूसरी की कामना में दुःखी होने लगते हैं। अर्थात दूसरे शब्दों में कहें तो भौतिकवाद हमारे सुखद जीवन के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है और यह बाधा कोई और हमारे जीवन से दूर नही कर सकता। इसके लिए हमें स्वयं अपनी जरूरतों की मर्यादा तय करनी होगी और आत्मज्ञान अर्थात अपनी सामर्थ्य की सीमाएं तय करनी होंगी।
