सुप्रभात!!
‘जो ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक रूप में देखता है, उसी का नजरिया सही है.’
ज्ञानी लोग प्रायः क्रोधित नहीं होते, क्योंकि वे जानते हैं कि क्रोध से भ्रम पैदा होता है. भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है. जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है. जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है.
ज्ञान को सद्कर्मों का माध्यम बनाएं!
आज का दिन हम सभी के लिए ज्ञान के नए द्वार खोले, यही शुभकामना है।

