Life

Respect the Authority of your seniors!

नमस्कार,
अपने से बड़ों और सम्माननीय स्वजनों की शक्ति और सामर्थ्य का सदैव मान रखना चाहिए, भले ही वो आपको हानि पहुँचाने की स्थिति में न हों।

रामायण के सुंदरकांड में महाबली हनुमान ने ऐसा ही उदाहरण तब प्रस्तुत किया जब रावण पुत्र इंद्रजीत ने उन्हें मारने के लिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। हनुमान जी जानते थे कि ब्रह्मास्त्र से उन्हें कोई हानि नहीं होने वाली, फिर भी उन्होंने ब्रह्माजी की शक्ति का मान रखने के लिए अपने आप को बंदी बनवा लिया।

सुनि सुत बध लंकेस रिसाना। पठएसि मेघनाद बलवाना।।
मारसि जनि सुत बांधेसु ताही। देखिअ कपिहि कहाँ कर आही।।
चला इंद्रजित अतुलित जोधा। बंधु निधन सुनि उपजा क्रोधा।।
कपि देखा दारुन भट आवा। कटकटाइ गर्जा अरु धावा।।
अति बिसाल तरु एक उपारा। बिरथ कीन्ह लंकेस कुमारा।।
रहे महाभट ताके संगा। गहि गहि कपि मर्दइ निज अंगा।।
तिन्हहि निपाति ताहि सन बाजा। भिरे जुगल मानहुँ गजराजा।
मुठिका मारि चढ़ा तरु जाई। ताहि एक छन मुरुछा आई।।
उठि बहोरि कीन्हिसि बहु माया। जीति न जाइ प्रभंजन जाया।।

ब्रह्म अस्त्र तेहिं साँधा कपि मन कीन्ह बिचार।
जौं न ब्रह्मसर मानउँ महिमा मिटइ अपार।।

ब्रह्मबान कपि कहुँ तेहि मारा। परतिहुँ बार कटकु संघारा।।
तेहि देखा कपि मुरुछित भयऊ। नागपास बाँधेसि लै गयऊ।।
जासु नाम जपि सुनहु भवानी। भव बंधन काटहिं नर ग्यानी।।
तासु दूत कि बंध तरु आवा। प्रभु कारज लगि कपिहिं बँधावा।।

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