10 Commandments of Sanatan Dharm

इस वीडियो में सनातन धर्म के 10 दिशा-निर्देशों अथवा 10 धर्मादेशों की चर्चा की गई है। यह सत्र भारत के एक सुप्रसिद्ध बिजनेस स्कूल के MBA विद्यार्थियों के लिए 7 अगस्त 2021 को डॉ. त्रिलोक शर्मा द्वारा आयोजित किया गया था।

भारतीय संस्कृति अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है तथा मेरी दृढ़ मान्यता है कि विश्व की अन्य कई संस्कृतियाँ हमारी संस्कृति से उत्पन्न हुई हैं।

सनातन धर्म की जब मैं बात करता हूँ तो वह हिन्दू धर्म की बात नहीं है। सनातन का अर्थ होता है –“सदैव अस्तित्व में रहने वाला” और धर्म का अर्थ होता है “आचरण” या “व्यवहार” या “जीवन शैली” (स धारयते इति धर्म😊)।

महर्षि पतंजलि रचित योग सूत्र के अष्टांग योग नामक अध्याय में उन्होंने योग सीखने और सिखाने लिए 10 प्राथमिक आवश्यकताओं का वर्णन किया है जो वस्तुत: प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के प्रत्येक क्षेत्र मे लागू होती हैं। इन्हीं 10 निर्देशों को सनातन धर्म के 10 आदेशों (Commandments) के रूप में भी जाना जाता है।

इन धर्मादेशों को 5-5 के दो भागों में विभक्त किया गया है – यम और नियम!

यम, वस्तुत: वो आचरण हैं जो देश, काल, भौगोलिक क्षेत्र, लिंग, जाति आदि से ऊपर हैं, अर्थात प्रत्येक काल में विश्व की हर सभ्यता और संस्कृति के लिए उतने ही प्रसंगिग और आवश्यक हैं जितनी कि प्राण वायु। ये आदेश, असल में समाज और व्यक्ति को सद्मार्ग और सुनीति पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

नियम, वो आदेश हैं, जिनका पालन व्यक्तिगत स्तर पर प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए। इनके पालन से व्यक्ति पवित्र विचारों के साथ एक सुदृढ़ व्यक्तित्व का निर्माण कर सकता है।

पाँच यम इस प्रकार हैं:

1. अहिंसा (Non -Violence)

2. सत्य (Telling and Doing the Truth)   

3. अस्तेय/अचौर्य (Non-Stealing)

4. ब्रह्मचर्य (Celibacy)

5. अपरिग्रह (Non-Coveting)

पाँच नियम इस प्रकार हैं:

1. शुचिता (Purity)

2. संतोष (Contentment)

3. तापस (Ardour or Austerity)

4. स्वाध्याय (Study of Self)

5. ईश्वर प्रणिधान/साक्षी भाव (Witness Conscious)    

TEN COMMANDMENTS OF SANATAN DHARM

In Ashtanga yoga part of the Patanjali Maharshi’s yoga sutra, 10 commandments are given as primary requirement for learning and teaching yoga. But these commandments are essential qualities of all persons and can be applied in his/ her daily walks of life.

These commandments can be learnt under two headings:- Yam and Niyam

Yama are ethical discipline transcending creed, country, age and time. These commandments are rules of morality for the society and the individual.

The five Yam are:

1.Ahimsa (nonviolence)

2.Satya (telling and doing truth)

3.Asteya (stealing)

4.Bramahmacharya

5.Aparigraha (non-coveting)

Niyam are rules of conduct that apply to individual and are self-purification by discipline.

Five Niyam are: –

1.Shaucha (purity)

2. Santosh (contentment)

3. Tapas (ardour or austerity)

4. Swadhyay (study of self)

5. Ishwara pranidhana.(sakshi bhav)

Published by DR. TRILOK SHARMA

I have traveled a long way towards the final destination of life. Many times I took a wrong turn on the road and spend a lot of precious time to come back on main road. Many times, I helped & supported the people who did not deserve my attention, and unknowingly ignored the ones who cared for me. Through this site, I want to put some traffic signs on the route of life to help those who are willing not to make similar mistakes that I did.

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